गंधार बुद्ध प्रतिमा और इंडो-ग्रीक सिक्के दर्शाता यवन प्रभाव चित्र
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भारत पर यवन प्रभाव: इंडो-ग्रीक संपर्क, संस्कृति, कला और विचार पर गहरा प्रभाव

भारत पर यवन प्रभाव: सांस्कृतिक, आर्थिक, कला एवं बौद्धिक परिवर्तन   भारत और यूनान के मध्य वास्तविक और प्रभावी संपर्क सिकंदर के अल्पकालीन आक्रमण से नहीं, बल्कि उसके बाद उभरे बैक्ट्रियन-यवन शासन से स्थापित हुआ। उत्तर-पश्चिमी भारत में उनकी उपस्थिति ने एक दीर्घकालिक सांस्कृतिक संवाद की नींव रखी, जो आने वाली शताब्दियों तक भारतीय इतिहास […]

हिन्द यवन राज्य के शासकों की दो प्राचीन मुद्राओं का चित्र
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हिन्द यवन राज्य: उदय, विस्तार, मेनाण्डर, गंधार कला और सम्पूर्ण इतिहास

प्रस्तावना : मौर्योत्तर भारत और हिन्द यवन सत्ता का उदय   मौर्य साम्राज्य के विघटन के बाद भारत के पश्चिमोत्तर भूभाग में जो राजनीतिक रिक्तता उत्पन्न हुई, उसने न केवल नए भारतीय वंशों के उदय को जन्म दिया बल्कि दूरस्थ यूनानी शक्तियों को भी भारत के आंतरिक राजनीतिक परिदृश्य में हस्तक्षेप करने का अवसर प्रदान

हिन्द-यवन इतिहास के स्रोत दर्शाता मानचित्र और प्राचीन सिक्के
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हिन्द-यवन इतिहास के स्रोत: साहित्य, अभिलेख और सिक्कों से मिला प्रमाण | UPSC Notes

हिन्द-यवन इतिहास के स्रोत: एक विश्लेषणात्मक परिचय   हिन्द-यवन राजाओं के राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास को समझने के लिए हिन्द-यवन इतिहास के स्रोत अत्यंत महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। भारतीय साहित्यिक ग्रंथों में जहाँ यवनों के संक्षिप्त उल्लेख बिखरे हुए मिलते हैं, वहीं यूनानी-रोमन लेखकों के वर्णन, अभिलेखों के सीमित परंतु मूल्यवान प्रमाण तथा बड़ी

सातवाहन वंश के पतन के कारण
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सातवाहन वंश के पतन के कारण: दक्कन के महान साम्राज्य का विघटन कैसे और क्यों हुआ?

सातवाहन वंश के पतन के कारण: अभिलेखीय साक्ष्यों, आर्थिक परिवर्तन और राजनीतिक विघटन का विश्लेषण   दक्कन के इतिहास में सातवाहन साम्राज्य एक ऐसी राजनीतिक इकाई के रूप में उभरता है जिसने दक्षिण और उत्तर भारत के बीच लंबी अवधि तक संतुलन बनाए रखा। लगभग तीन शताब्दियों तक चले इस राजवंश ने न केवल समुद्री

शक-सातवाहन संघर्ष का मानचित्र और सातवाहन शासनकाल के प्राचीन सिक्के – दक्कन व पश्चिम भारत में संघर्ष के क्षेत्र और मुद्रा-साक्ष्य दर्शाता चित्र
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शक–सातवाहन संघर्ष: पश्चिम भारत और दक्कन की सत्ता–राजनीति का निर्णायक अध्याय

  शक-सातवाहन संघर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ   शातकर्णि प्रथम (लगभग 27 ई.पू.-17 ई.पू.) की मृत्यु के बाद सातवाहन सत्ता जिस अनिश्चितता और अंधकार के दौर में प्रवेश करती है, उसी समय से आगे चलकर शक-सातवाहन संघर्ष की कथा का बीज बोया जाता है। सातवाहनों की प्रारंभिक शक्ति, उनके उदय और दक्कन में उनके विस्तार को

सातवाहन कालीन कला एवं स्थापत्य - प्राचीन भारतीय रॉक-कट गुफा वास्तुकला का उदाहरण
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सातवाहन कालीन कला एवं स्थापत्य: दक्खिन की सांस्कृतिक उन्नति का स्वर्णिम अध्याय

  सातवाहन कालीन कला एवं स्थापत्य भारतीय सांस्कृतिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण अध्याय है जिसमें दक्खिन के धार्मिक, आर्थिक और कलात्मक जीवन का समन्वित स्वरूप स्पष्ट रूप से उभरता है। ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी से लेकर ईसा की तृतीय शताब्दी तक विस्तृत इस काल में स्तूप, चैत्यगृह, विहार और मूर्तिकला की परंपराओं ने अभूतपूर्व विकास

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