कृष्णदेव राय का शासनकाल दर्शाता विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण युग
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कृष्णदेव राय का शासनकाल: विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण युग (1509-1529 ई.)

  कृष्णदेव राय का शासनकाल – ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि   कृष्णदेव राय का शासनकाल (1509-1529 ई.) विजयनगर साम्राज्य के इतिहास में केवल एक शासक के दीर्घकालीन शासन का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह वह चरण है जहाँ राजनीतिक शक्ति, प्रशासनिक दक्षता, सैन्य संगठन और सांस्कृतिक चेतना एक साथ परिपक्व रूप में दिखाई देती है। […]

महमूद गवां का प्रशासनिक सुधार और बहमनी शासन का प्रतीकात्मक चित्र
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महमूद गवां का प्रशासनिक सुधार : बहमनी सल्तनत में शासन, नीति और पतन का विश्लेषण

दक्कन के मध्यकालीन इतिहास में बहमनी सल्तनत एक ऐसे राज्य के रूप में उभरी, जो भौगोलिक विस्तार, सांस्कृतिक विविधता और राजनीतिक जटिलताओं, तीनों से घिरा हुआ था। उत्तर भारत की सल्तनतों से भिन्न, बहमनी राज्य को न केवल बाहरी शत्रुओं से जूझना पड़ा, बल्कि भीतर ही भीतर प्रशासनिक असंतुलन, प्रांतीय स्वायत्तता और अमीर-उमराव के गुटीय

बहमनी साम्राज्य का राजनीतिक इतिहास दर्शाता दक्कन का मध्यकालीन दृश्य
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बहमनी साम्राज्य का राजनीतिक इतिहास (1347–1527 ई.) : दक्कन में सत्ता, संघर्ष और पतन

दक्कन के इतिहास में बहमनी साम्राज्य केवल एक स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की स्थापना का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह मध्यकालीन भारत की राजनीतिक संरचना, शक्ति-संतुलन और क्षेत्रीय सत्ता-विकास का निर्णायक अध्याय भी था। दिल्ली सल्तनत की केंद्रीकृत सत्ता से अलग होकर दक्कन में जिस स्वतंत्र राजनीतिक परंपरा का उदय हुआ, उसका सबसे सशक्त रूप बहमनी

विजयनगर साम्राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना दर्शाता कृषि, समाज और राज्य
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विजयनगर साम्राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना: समाज, अर्थव्यवस्था और राज्य का समग्र अध्ययन

  विजयनगर साम्राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना मध्यकालीन दक्षिण भारत के इतिहास को समझने की एक केंद्रीय कुंजी है। 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच विकसित यह साम्राज्य केवल सैन्य शक्ति या राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी स्थिरता और दीर्घायु का वास्तविक आधार उसका संगठित समाज और कृषि-प्रधान, किंतु व्यावसायिक रूप से विकसित

उत्तरी भारत में स्वतंत्र मुस्लिम राज्यों का उदय का ऐतिहासिक दृश्य
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उत्तरी भारत में स्वतंत्र मुस्लिम राज्यों का उदय : दिल्ली सल्तनत के पतन के बाद सत्ता का पुनर्गठन

  भूमिका : दिल्ली सल्तनत के विघटन और उत्तरी भारत में स्वतंत्र मुस्लिम राज्यों का उदय   मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में उत्तरी भारत में स्वतंत्र मुस्लिम राज्यों का उदय एक ऐसी ऐतिहासिक प्रक्रिया है, जो न तो अचानक घटित हुई और न ही केवल व्यक्तियों की महत्वाकांक्षा का परिणाम थी। यह प्रक्रिया दिल्ली

लोदी वंश का इतिहास में इब्राहीम लोदी और बाबर का संघर्ष
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लोदी वंश का इतिहास : दिल्ली सल्तनत का अंतिम चरण (1451-1526 ई.)

दिल्ली सल्तनत के इतिहास में लोदी वंश का उदय एक ऐसे समय में हुआ, जब केंद्रीय सत्ता पहले ही गहरी प्रशासनिक और राजनीतिक संकट से गुजर रही थी। तुर्क शासकों के लंबे शासन के बाद अफ़ग़ान सत्ता की स्थापना केवल वंश परिवर्तन नहीं थी, बल्कि यह सल्तनत की संरचनात्मक कमजोरी का परिणाम भी थी। इसी

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