कुषाण सम्राट कनिष्क की राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक उपलब्धियां
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कनिष्क की उपलब्धियां: कुषाण साम्राज्य का उत्कर्ष, बौद्ध संरक्षण और एशियाई प्रभाव

कनिष्क की उपलब्धियां : कुषाण इतिहास में एक निर्णायक मोड़ प्राचीन भारत के मौर्योत्तर इतिहास में कनिष्क का स्थान केवल एक शक्तिशाली शासक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में है जिसने कुषाण सत्ता को क्षेत्रीय प्रभुत्व से उठाकर अंतर-एशियाई साम्राज्य का स्वरूप दिया। कनिष्क की उपलब्धियां इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं […]

कनिष्क कालीन स्वर्ण मुद्राएँ और कुषाणकालीन आर्थिक समृद्धि
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कनिष्क कालीन आर्थिक व्यवस्था: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, स्वर्ण प्रवाह और नगरीकरण

  कनिष्क का युग और आर्थिक परिवर्तन का संदर्भ   द्वितीय शताब्दी ईस्वी का काल प्राचीन भारतीय इतिहास में एक ऐसे संक्रमण को चिह्नित करता है, जब भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति न रहकर क्रमशः एक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक तंत्र का अभिन्न अंग बनता है। इस परिवर्तन की केन्द्रीय धुरी कुषाण शासक कनिष्क का शासनकाल था।

कनिष्क कालीन बौद्ध मूर्तिकला और धार्मिक नीति का प्रतीक
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कनिष्क की धार्मिक नीति: महायान बौद्ध धर्म, चतुर्थ संगीति और कुषाणकालीन सहिष्णुता

कुषाण काल में धर्म और सत्ता का संबंध   भारतीय प्राचीन इतिहास में कुषाण शासक कनिष्क का स्थान केवल एक विजेता सम्राट के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे शासक के रूप में भी महत्वपूर्ण है जिसने धर्म को राज्य की वैधता और सांस्कृतिक एकीकरण का माध्यम बनाया। यद्यपि उत्तरी भारत और मध्य एशिया में

कुषाण शासक का स्वर्ण सिक्का और प्रशासनिक प्रतीक
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कुषाण साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था: शासन, प्रान्त, सेना और राजसत्ता का विश्लेषण

  कुषाण साम्राज्य का उदय और कनिष्क की विजयें   कुषाण साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था प्राचीन भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जो मध्य एशिया से भारत तक फैले एक विशाल साम्राज्य की शासन-कला को उजागर करता है। कुषाण शासकों, विशेष रूप से कनिष्क के नेतृत्व में, इस व्यवस्था ने सामंती तत्वों, सैन्य शक्ति

कनिष्क के स्वर्ण सिक्के, कुषाण साम्राज्य का मौद्रिक प्रमाण
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कनिष्क के राज्यारोहण की तिथि: इतिहास, प्रमाण और विद्वानों के मत

कुषाण साम्राज्य का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक उभार की एक महत्त्वपूर्ण धुरी है। विम कडफिसेस के पश्चात् जब साम्राज्य की बागडोर कनिष्क के हाथों में आई, तब भारतीय इतिहास एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचा। कनिष्क न केवल कुषाण वंश के सर्वाधिक शक्तिशाली शासक थे, बल्कि बौद्ध धर्म, अंतर-क्षेत्रीय वाणिज्य, कला एवं

रुद्रदामन के प्राचीन सिक्के का अंकित मुख और ब्राह्मी लेख
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रुद्रदामन: पश्चिमी क्षत्रपों का उदय, विजयें और प्रशासन – एक गहन ऐतिहासिक विश्लेषण

परिचय: शक सत्ता के पुनरुत्थान का युग और रुद्रदामन प्रथम   चष्टन की मृत्यु के बाद उसका पौत्र रुद्रदामन प्रथम पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों का शासक बना। उससे पहले शक शक्ति क्षीण हो रही थी और कई क्षेत्रों में उनका प्रभाव संकट में था। ऐसे संक्रमणकाल में सत्ता सँभालकर रुद्रदामन ने न केवल शक

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