ancient India

सैंधव सभ्यता के धार्मिक विश्वास: मातृदेवी से शिव पूजा तक के रहस्य

सैंधव सभ्यता के धार्मिक विश्वास अभी भी रहस्यों से भरी हुई हैं। लिखित स्रोत उपलब्ध न होने के कारण पुरातात्विक खोजें ही इसके विश्वासों को समझने की एकमात्र कुंजी हैं। मुहरों पर अंकित देव-प्रतिमाएँ, अग्निकुंड, वृक्ष–पूजा, पशुपति-आकृति, मातृ-देवी की मूर्तियाँ – सभी मिलकर यह संकेत देती हैं कि यह सभ्यता प्रकृति-प्रधान और प्रतीकवादी धार्मिक व्यवस्था […]

A carved stone seal from the Harappan Civilization depicting a mythical unicorn-like creature, with a single horn, detailed body, and a short tail. The creature is shown in profile, with its head turned slightly, and is surrounded by intricate geometric patterns.
ancient India

सिंधु सभ्यता का सामाजिक, आर्थिक और शिल्प जीवन

सैंधव सभ्यता, जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, प्राचीन भारत की एक प्रमुख और अत्यधिक विकसित सभ्यता थी। यह सभ्यता लगभग 3300 से 1300 ईसा पूर्व के बीच सिंधु नदी घाटी क्षेत्र में फैली हुई थी। इस लेख में हम सिंधु सभ्यता का सामाजिक और आर्थिक जीवन का विश्लेषण करेंगे, लेकिन यदि आप सैंधव

सिन्धु घाटी सभ्यता के पुरोहित राजा की मूर्ति, जो प्राचीन भारत की धार्मिक और शाही संस्कृति का प्रतीक है। यह मूर्ति मोहनजोदड़ो से मिली थी और इसे उस समय की महान कला और समाज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।
ancient India

सिंधु घाटी सभ्यता: उत्पत्ति, विस्तार और ऐतिहासिक महत्व

सिंधु घाटी की सभ्यता: एक प्राचीन समृद्धि का अवलोकन    बीसवीं सदी के प्रारंभ में, जब दुनिया को अपनी सभ्यताओं के प्राचीनतम स्वरूप के बारे में जानकारी कम थी, तब तक यह विश्वास था कि वैदिक सभ्यता भारत की सबसे पुरानी थी। परंतु, 1920 के दशक में, जब पुरातत्त्वशास्त्रियों ने सिंधु घाटी में खुदाई शुरू

ancient India

भारत का मध्य पाषाणकाल और नवपाषाणकाल: इतिहास, जीवनशैली और पुरातात्विक खोजें

  भारत में मध्य पाषाणकाल (Mesolithic Age) (लगभग 12,000 BC से 5,000 BC) प्राचीन मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण समय था, जब इंसानों ने छोटे-छोटे पत्थर के औजारों का इस्तेमाल करना शुरू किया। यह काल पुरापाषाणकाल (Paleolithic) और नवपाषाणकाल (Neolithic) के बीच का समय है। इस समय के लोग मुख्य रूप से शिकार पर निर्भर

आश्यूलियन हैंडएक्स के चार दिशा से ली गई तस्वीरें।
ancient India

पाषाणकालीन सभ्यता और दक्षिण भारत की हैंडएक्स परंपरा: इतिहास और अध्ययन

प्रागैतिहासिक काल   इतिहास का अध्ययन मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: प्रागैतिहास, आद्य-इतिहास और इतिहास।  प्रागैतिहास उस समय को कहते हैं, जिसमें लिखित साक्ष्य नहीं मिलते। आद्य-इतिहास वह समय होता है, जिसमें लिपि के संकेत मिलते हैं, लेकिन वे अपठ्य या अस्पष्ट होते हैं। जब लिखित साक्ष्य मिलने लगते हैं, तब

वॉरेन हैस्टिंग्स पर महाभियोग के दौरान वेस्टमिंस्टर हॉल का आंतरिक दृश्य, ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में
modern india

वॉरेन हेस्टिंग्स पर महाअभियोग: एक ऐतिहासिक विश्लेषण

  वॉरेन हेस्टिंग्स पर महाभियोग ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे विवादास्पद और ऐतिहासिक घटनाओं में से एक था। इसने न केवल ब्रिटिश और भारतीय राजनीति में उथल-पुथल मचाई, बल्कि यह पूरे उपनिवेशी शासन और ब्रिटिश साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे के खिलाफ सवाल उठाने का एक अहम अवसर बन गया। इस लेख में हम वॉरेन हैस्टिंग्स के महाभियोग

Scroll to Top