Author name: Vivek Singh

Vivek Singh is the founder of Tareek-e-Jahan, a Hindi history blog offering evidence-based and exam-oriented perspectives on Indian history.

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भारत का मध्य पाषाणकाल और नवपाषाणकाल: इतिहास, जीवनशैली और पुरातात्विक खोजें

  भारत में मध्य पाषाणकाल (Mesolithic Age) (लगभग 12,000 BC से 5,000 BC) प्राचीन मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण समय था, जब इंसानों ने छोटे-छोटे पत्थर के औजारों का इस्तेमाल करना शुरू किया। यह काल पुरापाषाणकाल (Paleolithic) और नवपाषाणकाल (Neolithic) के बीच का समय है। इस समय के लोग मुख्य रूप से शिकार पर निर्भर […]

आश्यूलियन हैंडएक्स के चार दिशा से ली गई तस्वीरें।
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पाषाणकालीन सभ्यता और दक्षिण भारत की हैंडएक्स परंपरा: इतिहास और अध्ययन

प्रागैतिहासिक काल   इतिहास का अध्ययन मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: प्रागैतिहास, आद्य-इतिहास और इतिहास।  प्रागैतिहास उस समय को कहते हैं, जिसमें लिखित साक्ष्य नहीं मिलते। आद्य-इतिहास वह समय होता है, जिसमें लिपि के संकेत मिलते हैं, लेकिन वे अपठ्य या अस्पष्ट होते हैं। जब लिखित साक्ष्य मिलने लगते हैं, तब

वॉरेन हैस्टिंग्स पर महाभियोग के दौरान वेस्टमिंस्टर हॉल का आंतरिक दृश्य, ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में
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वॉरेन हेस्टिंग्स पर महाअभियोग: एक ऐतिहासिक विश्लेषण

  वॉरेन हेस्टिंग्स पर महाभियोग ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे विवादास्पद और ऐतिहासिक घटनाओं में से एक था। इसने न केवल ब्रिटिश और भारतीय राजनीति में उथल-पुथल मचाई, बल्कि यह पूरे उपनिवेशी शासन और ब्रिटिश साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे के खिलाफ सवाल उठाने का एक अहम अवसर बन गया। इस लेख में हम वॉरेन हैस्टिंग्स के महाभियोग

वॉरेन हेस्टिंग्स के विवाद
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वॉरेन हैस्टिंग्स का विवादास्पद शासन: नंद कुमार और चैत सिंह के मामलों का विश्लेषण

वॉरेन हैस्टिंग्स का नाम भारतीय इतिहास में एक बेहद विवादास्पद और महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में जाना जाता है। वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले गवर्नर-जनरल थे, लेकिन उनका शासन कभी भी निष्कलंक नहीं रहा। उनकी नीतियाँ, उनके द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधार और उनके खिलाफ उठे आरोप आज भी इतिहासकारों के बीच बहस

टिली केटल द्वारा वॉरेन हेस्टिंग्स का चित्र, जिसमें वह formal पोशाक पहने हुए हैं और उनके चेहरे पर गंभीर अभिव्यक्ति है।
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वॉरेन हेस्टिंग्स के प्रशासनिक, राजस्व और न्यायिक सुधारों का ऐतिहासिक विश्लेषण

वॉरेन हैस्टिंग्स और उनके प्रशासनिक तथा राजस्व सुधार   1772 में वॉरेन हैस्टिंग्स को बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया। यह ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। कंपनी ने मुग़ल साम्राज्य की सत्ता को स्वीकार करते हुए बंगाल पर विजय प्राप्ति के अधिकार से शासन करने का निर्णय लिया। इस समय

रॉबर्ट क्लाइव और शाह आलम II का ऐतिहासिक मिलन, 1765 में, इलाहाबाद संधि के बाद।
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रॉबर्ट क्लाइव और बक्सर की विजय: बंगाल में ड्यूल सिस्टम की स्थापना और इसके दुष्प्रभाव

जब बक्सर की विजय की खबर इंग्लैंड पहुंची, तो लंदन में सामान्य राय थी कि वह व्यक्ति, जिसने बंगाल में कंपनी की राजनीतिक शक्ति की नींव रखी थी, उसे फिर से भेजा जाना चाहिए ताकि उस नींव पर मजबूत इमारत को खड़ी किया जा सके। इस प्रकार रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल में ब्रिटिश उपनिवेशों का

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