Author name: Vivek Singh

Vivek Singh is the founder of Tareek-e-Jahan, a Hindi history blog offering evidence-based and exam-oriented perspectives on Indian history.

उत्तर वैदिक काल - सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिवर्तन
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उत्तर वैदिक काल: सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिवर्तन

  उत्तर वैदिक काल    उत्तर वैदिक काल का इतिहास ऋग्वेद के बाद के ग्रंथों से मिलता है। यह काल लगभग ई. पू. 1000 से 600 तक माना जाता है। ऋग्वैदिक काल में आर्य सभ्यता पंजाब और सिन्ध क्षेत्र तक सीमित थी। हालांकि, उत्तर वैदिक काल में आर्य सभ्यता का विस्तार एक बड़े क्षेत्र में […]

ऋग्वैदिक कालीन धर्म
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ऋग्वैदिक कालीन धर्म और धार्मिक विश्वास

ऋग्वैदिक कालीन धर्म और धार्मिक विश्वास: ऋग्वैदिक आर्य समाज की धार्मिक प्रणाली    ऋग्वैदिक आर्य समाज का धार्मिक जीवन अत्यंत विस्तृत और जटिल था, जबकि उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन सरल था। ऋग्वैदिक कालीन धर्म में ‘बहुदेववाद’ प्रमुख था। आर्य देवताओं को प्राकृतिक शक्तियों के रूप में देखते थे। इन देवताओं का मानवीकरण किया गया

वैदिक लोगों का भोजन
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वैदिक काल का आहार: क्या खाते थे हमारे पूर्वज?

  वैदिक काल में लोग क्या खाते थे ?   भारत के प्राचीन इतिहास में वैदिक काल का अत्यधिक महत्व है, जो लगभग 1500 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक फैला हुआ था। यह समय भारतीय समाज के विकास में महत्वपूर्ण था, जहां कृषि, पशुपालन और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख स्थान था। वैदिक साहित्य

ऋग्वैदिक काल का आर्थिक जीवन
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ऋग्वैदिक काल का आर्थिक जीवन : कृषि, पशुपालन, व्यापार और उद्योग

  ऋग्वैदिक काल का आर्थिक जीवन (Economic Life in the Rigvedic Period)   ऋग्वैदिक काल का आर्थिक जीवन मुख्यतः कृषि, पशुपालन, व्यापार और उद्योग पर आधारित था। जो उस समय के सामाजिक ढांचे और जीवनशैली का अहम हिस्सा थे। इस काल में समाज की अधिकांश गतिविधियाँ कृषि और पशुपालन से जुड़ी थीं, लेकिन व्यापार और

ऋग्वैदिक समाज
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ऋग्वैदिक समाज: परिवार, विवाह, वर्ण व्यवस्था और स्त्रियों की स्थिति

  क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे समाज की जड़ें कहां से आईं? ऋग्वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईसा पूर्व), भारतीय सभ्यता का प्रारंभिक दौर, एक ऐसे समय को दर्शाता है जब सामाजिक संरचनाएँ, परिवार, विवाह और स्त्रियों की स्थिति ने आकार लिया। इस काल में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक

आर्यों की उत्पत्ति
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आर्यों का मूल स्थान: क्या हैं विवादित सिद्धांत?

  आर्यों की उत्पत्ति: आर्य कौन थे?   “आर्य” शब्द का प्रयोग प्राचीन भारतीय समाज में विभिन्न संदर्भों में किया गया है। यह शब्द संस्कृत के “आर्य” (Arya) से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘श्रेष्ठ’, ‘उत्कृष्ट’ या ‘आदर्श’। ऐतिहासिक रूप से, आर्य शब्द का उपयोग Indo-Aryan भाषा बोलने वाले लोगों को संदर्भित करने के

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