गुप्त वंश का मूल निवास स्थान दर्शाते गुप्त स्वर्ण सिक्के
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गुप्त वंश का मूल निवास स्थान: इतिहासकारों के मत और साक्ष्य

  गुप्त वंश का मूल निवास स्थान : एक ऐतिहासिक समस्या   गुप्त वंश की उत्पत्ति के प्रश्न की भाँति ही गुप्त वंश का मूल निवास स्थान भी प्राचीन भारतीय इतिहास की सबसे जटिल और विवादास्पद समस्याओं में से एक है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रारम्भिक गुप्त शासकों से संबंधित स्पष्ट और प्रत्यक्ष […]

गुप्त वंश की उत्पत्ति से जुड़ी प्रारंभिक गुप्त स्वर्ण मुद्राएँ
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गुप्त वंश की उत्पत्ति: शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय या ब्राह्मण? एक ऐतिहासिक विश्लेषण

गुप्त वंश की उत्पत्ति – इतिहासलेखन की एक जटिल समस्या   प्राचीन भारतीय इतिहास में गुप्त काल को सामान्यतः राजनीतिक स्थिरता, सांस्कृतिक उत्कर्ष और बौद्धिक सृजन के “स्वर्णयुग” के रूप में देखा जाता है, किंतु इसी संदर्भ में गुप्त वंश की उत्पत्ति आज भी इतिहासलेखन की सबसे जटिल और विवादास्पद समस्याओं में गिनी जाती है।

गुप्त साम्राज्य के इतिहास के स्रोत और सांस्कृतिक साक्ष्य
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गुप्त वंश के इतिहास के स्रोत: साहित्य, अभिलेख और पुरातात्त्विक साक्ष्य

  गुप्त वंश के इतिहास के स्रोत : भूमिका और ऐतिहासिक संदर्भ   कुषाण साम्राज्य के विघटन के पश्चात् भारत में जिस राजनीतिक विकेन्द्रीकरण का आरम्भ हुआ, वह लगभग चतुर्थ शताब्दी ईस्वी के प्रारम्भ तक चलता रहा, जिसकी विस्तृत चर्चा गुप्तों के उदय से पूर्व भारत की राजनीतिक स्थिति में की जा चुकी है।। पश्चिमी

गुप्त साम्राज्य के उदय से पूर्व भारत का राजनीतिक मानचित्र
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गुप्तों के उदय से पूर्व भारत की राजनैतिक दशा: विखंडन से साम्राज्य की ओर

गुप्तों के उदय से पूर्व भारत की राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए हमें उस संक्रमणकाल की ओर देखना होगा, जो कुषाण साम्राज्य के पतन और गुप्त शक्ति के उभार के बीच फैला हुआ था। यह काल भारतीय इतिहास में केन्द्रीय सत्ता के विघटन, क्षेत्रीय शक्तियों के उभार और दीर्घकालिक राजनीतिक अस्थिरता का युग माना

कुषाण साम्राज्य के पतन के ऐतिहासिक कारणों का विश्लेषण
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कुषाण साम्राज्य के पतन के कारण: विद्वानों के मत और ऐतिहासिक विश्लेषण

  कुषाण साम्राज्य का पतन भारतीय प्राचीन इतिहास की उन जटिल प्रक्रियाओं में से एक है, जिन्हें कुषाण साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को समझे बिना पूर्णतः स्पष्ट नहीं किया जा सकता।  लगभग पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी तक उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी भारत की राजनीति पर प्रभुत्व रखने वाले कुषाणों का अवसान एक दीर्घकालीन ऐतिहासिक प्रक्रिया

कनिष्क कालीन कला में गंधार और मथुरा शैली
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कनिष्क कालीन कला : गंधार और मथुरा शैलियों का ऐतिहासिक विश्लेषण

कुषाण सम्राट कनिष्क का शासनकाल भारतीय कला के इतिहास में केवल एक राजकीय चरण नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन का काल है। इसी युग में कनिष्क कालीन कला ने प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति से आगे बढ़कर मूर्त रूप धारण किया और धार्मिक विचारधाराओं, दार्शनिक अवधारणाओं तथा राजसत्ता के संरक्षण के संयुक्त प्रभाव में एक नवीन कलात्मक परंपरा

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