काच और समुद्रगुप्त से संबंधित गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्के
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समुद्रगुप्त का उत्तराधिकार संघर्ष: काच विवाद और प्रयाग प्रशस्ति का ऐतिहासिक विश्लेषण

  गुप्त काल का अध्ययन करते समय समुद्रगुप्त का उत्तराधिकार संघर्ष इतिहासकारों के बीच सबसे अधिक विवादित और विचारोत्तेजक विषयों में से एक रहा है। चन्द्रगुप्त प्रथम के पश्चात् सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया न केवल चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास को समझने में सहायक है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि समुद्रगुप्त जैसे शक्तिशाली सम्राट […]

समुद्रगुप्त के इतिहास के स्रोत दर्शाते सिक्के और प्रयाग प्रशस्ति
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समुद्रगुप्त के इतिहास के स्रोत : प्रयाग प्रशस्ति, सिक्के और ऐतिहासिक विश्लेषण

  समुद्रगुप्त के इतिहास के स्रोत गुप्तकालीन इतिहास-लेखन की रीढ़ हैं। गुप्त साम्राज्य के विस्तार, राजनीतिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक दृष्टि और शासकीय विचारधारा को समझने में ये स्रोत निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यद्यपि समुद्रगुप्त के काल का कोई विस्तृत समकालीन इतिहास ग्रंथ उपलब्ध नहीं है, फिर भी अभिलेख, सिक्के और सीमित साहित्यिक साक्ष्य उसके व्यक्तित्व और

चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास दर्शाता गुप्त कालीन स्वर्ण सिक्का
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चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास: गुप्त साम्राज्य के वास्तविक संस्थापक

भूमिका: चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास क्यों महत्वपूर्ण है   प्राचीन भारतीय इतिहास में चन्द्रगुप्त प्रथम का इतिहास केवल एक शासक की जीवनी नहीं, बल्कि मौर्योत्तर भारत में साम्राज्य-निर्माण की प्रक्रिया को समझने की कुंजी है। तीसरी शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्द्ध में, जब उत्तर भारत छोटे-छोटे राजनीतिक इकाइयों में बँटा हुआ था, उसी समय गुप्त वंश

गुप्त वंश का मूल निवास स्थान दर्शाते गुप्त स्वर्ण सिक्के
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गुप्त वंश का मूल निवास स्थान: इतिहासकारों के मत और साक्ष्य

  गुप्त वंश का मूल निवास स्थान : एक ऐतिहासिक समस्या   गुप्त वंश की उत्पत्ति के प्रश्न की भाँति ही गुप्त वंश का मूल निवास स्थान भी प्राचीन भारतीय इतिहास की सबसे जटिल और विवादास्पद समस्याओं में से एक है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रारम्भिक गुप्त शासकों से संबंधित स्पष्ट और प्रत्यक्ष

गुप्त वंश की उत्पत्ति से जुड़ी प्रारंभिक गुप्त स्वर्ण मुद्राएँ
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गुप्त वंश की उत्पत्ति: शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय या ब्राह्मण? एक ऐतिहासिक विश्लेषण

गुप्त वंश की उत्पत्ति – इतिहासलेखन की एक जटिल समस्या   प्राचीन भारतीय इतिहास में गुप्त काल को सामान्यतः राजनीतिक स्थिरता, सांस्कृतिक उत्कर्ष और बौद्धिक सृजन के “स्वर्णयुग” के रूप में देखा जाता है, किंतु इसी संदर्भ में गुप्त वंश की उत्पत्ति आज भी इतिहासलेखन की सबसे जटिल और विवादास्पद समस्याओं में गिनी जाती है।

गुप्त साम्राज्य के इतिहास के स्रोत और सांस्कृतिक साक्ष्य
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गुप्त वंश के इतिहास के स्रोत: साहित्य, अभिलेख और पुरातात्त्विक साक्ष्य

  गुप्त वंश के इतिहास के स्रोत : भूमिका और ऐतिहासिक संदर्भ   कुषाण साम्राज्य के विघटन के पश्चात् भारत में जिस राजनीतिक विकेन्द्रीकरण का आरम्भ हुआ, वह लगभग चतुर्थ शताब्दी ईस्वी के प्रारम्भ तक चलता रहा, जिसकी विस्तृत चर्चा गुप्तों के उदय से पूर्व भारत की राजनीतिक स्थिति में की जा चुकी है।। पश्चिमी

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