राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
Indian polity

कैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बदली भारत की राजनीति और संस्कृति

  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गठन 1925 में हुआ था, और यह संगठन भारतीय समाज और राजनीति पर गहरा प्रभाव डालता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के पीछे का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और समाज के मूल्य सिस्टम को मजबूत करना था। केशव बलिराम हेडगवार द्वारा स्थापित यह संगठन शुरू में एक सांस्कृतिक और […]

भारत में महिला सशक्तिकरण का इतिहास दर्शाने वाली प्रतीकात्मक छवि, जिसमें प्राचीन विदुषी, मध्यकालीन रानी, स्वतंत्रता सेनानी और आधुनिक भारतीय महिला की छवि दिखाई गई है।
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भारत में महिला सशक्तिकरण का इतिहास: प्राचीन काल से 21वीं सदी तक की यात्रा

  भारत में महिला सशक्तिकरण का इतिहास विविध और समृद्ध है, जो सदियों से बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक संदर्भों के साथ विकसित हुआ है। प्रारंभिक काल में, भारतीय महिलाओं को समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था, और वे शैक्षणिक, धार्मिक, और आर्थिक क्षेत्रों में प्रमुख भूमिका निभाती थीं। समय के साथ, इन अधिकारों और

भारत में पर्यावरण आंदोलन का प्रतीक – ग्रामीण महिलाएँ पेड़ों को गले लगाती हुईं, पीछे जंगल और प्रदूषण का दृश्य
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भारत में पर्यावरण आंदोलन का इतिहास: चिपको से लेकर आधुनिक जलवायु संघर्ष तक

  भारत में पर्यावरण आंदोलन का इतिहास और महत्व   भारत में पर्यावरण आंदोलन का इतिहास गहराई और विविधता से भरा हुआ है, जिसमें जमीनी स्तर की सक्रियता, सरकारी हस्तक्षेप, न्यायिक भागीदारी, और अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रभाव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह आंदोलन दशकों से विकसित हुआ है, जिसमें वनों की कटाई, प्रदूषण, और

वाल्टर सोम्ब्रे और बेगम समरू अपने दरबार में ।
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बेगम समरू: दिल्ली की नर्तकी से साम्राज्ञी बनने तक की रोमांचक यात्रा

  क्या आप जानते हैं कि 18वीं शताब्दी की दिल्ली में एक नर्तकी कैसे बनी भारत की सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी रानी? जी हां, हम बात कर रहे हैं बेगम समरू की, फरजाना ज़ेब उन-निसा से जोआना तक की उस अद्भुत यात्रा की, जहां नृत्य की लय से निकलकर उन्होंने तलवार की धार पकड़ी और

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ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में प्लासी के युद्ध तक का सफर: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालिक प्रभाव

  ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) का नाम इतिहास के पन्नों में ब्रिटिश साम्राज्य की शुरुआत के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। यह कंपनी न केवल एक व्यापारिक संगठन थी, बल्कि समय के साथ एक शक्तिशाली राजनीतिक और सैन्य शक्ति के रूप में उभरकर आई। 1600 में स्थापित इस

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कलिंग के शासक खारवेल: सैन्य विजय, प्रशासनिक सुधार और सांस्कृतिक धरोहर

  हाथीगुम्फा गुफा, उदयगिरि और खंडगिरि गुफाओं में से एक   खारवेल प्राचीन भारत के एक महान शासक थे, जो लगभग 1st सदी ईसा पूर्व में कलिंग (आधुनिक ओडिशा) के सम्राट थे। खारवेल महापद्म नंद वंश के बाद कलिंग की सत्ता में आए और उनके शासनकाल को उनके सैन्य अभियानों, धार्मिक संरक्षण, और वास्तुकला के

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