दिल्ली सल्तनत में इक्ता प्रणाली का प्रशासनिक और सैन्य ढाँचा
Medieval India

इक्ता प्रणाली : दिल्ली सल्तनत में प्रशासन, सेना और राज्य निर्माण का आधार

इक्ता प्रणाली क्या है? : परिभाषा, आशय और ऐतिहासिक संदर्भ   मध्यकालीन भारत के प्रशासनिक इतिहास को समझने के लिए इक्ता प्रणाली को केवल एक राजस्व या वेतन व्यवस्था के रूप में देखना एक गंभीर भूल होगी। वस्तुतः यह प्रणाली दिल्ली सल्तनत के उस प्रयास का परिणाम थी, जिसके माध्यम से एक नवगठित, सैन्य-आधारित और […]

सल्तनत कालीन संगीत में दरबारी और सूफी परंपरा का विकास
Medieval India

सल्तनत कालीन संगीत : दरबार, सूफी परंपरा और भारतीय शास्त्रीय संगीत की नींव

  सल्तनत कालीन संगीत (13वीं-15वीं शताब्दी) भारतीय संगीत इतिहास का वह चरण था, जहाँ दरबारी संरक्षण, सूफी परंपरा और क्षेत्रीय प्रयोगों ने मिलकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की आधारभूमि तैयार की। सल्तनत कालीन संगीत को भारतीय इतिहास लेखन में प्रायः दो सीमित दृष्टियों के भीतर बाँध दिया गया है। एक ओर इसे मुग़ल कालीन संगीत की

सल्तनत कालीन साहित्य में संस्कृत और फारसी परंपराएँ
Medieval India

सल्तनत कालीन साहित्य : संस्कृत, फारसी और क्षेत्रीय भाषाओं का ऐतिहासिक विश्लेषण

सल्तनत कालीन साहित्य को प्रायः एकांगी दृष्टि से देखा गया है, जहाँ उसका मूल्यांकन केवल फारसी दरबारी रचनाओं या इस्लामी विद्वत साहित्य तक सीमित कर दिया जाता है। इस संकीर्ण दृष्टिकोण के कारण यह धारणा बन गई कि तेरहवीं से पंद्रहवीं शताब्दी के बीच भारत में संस्कृत साहित्य का ह्रास हो गया और साहित्यिक सृजन

भक्ति आंदोलन का इतिहास दर्शाती निर्गुण–सगुण भक्ति परंपराएँ
Medieval India

भक्ति आंदोलन का इतिहास: उत्पत्ति, विकास और सामाजिक मूल्यांकन

भारतीय इतिहास में भक्ति आंदोलन को प्रायः एक धार्मिक जागरण या संतों की आध्यात्मिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। किंतु यदि इसे केवल ईश्वर-भक्ति, काव्यात्मक अभिव्यक्ति या व्यक्तिगत आस्था तक सीमित कर दिया जाए, तो इसके ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता। वास्तव में, भक्ति आंदोलन का इतिहास भारतीय

मध्यकालीन भारत में सूफी आंदोलन और दरगाह संस्कृति
Medieval India

सूफी आंदोलन: उदय, विचारधारा, सिलसिले और भारतीय समाज पर प्रभाव

मध्यकालीन इस्लामी इतिहास में सूफी आंदोलन का उदय किसी शांत आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक गहरे नैतिक और वैचारिक संकट की पृष्ठभूमि में हुआ। उमय्यद और अब्बासी काल में इस्लामी समाज के बढ़ते राजनीतिक वैभव, धार्मिक औपचारिकता और सत्ता, केन्द्रित संरचना ने ऐसे धार्मिक अनुभवों के लिए स्थान संकुचित कर दिया, जो

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला के प्रमुख स्थापत्य स्मारक
Medieval India

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला: विकास, विशेषताएँ और क्षेत्रीय शैलियाँ

सल्तनत कालीन स्थापत्य कला मध्यकालीन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण संक्रमणकाल को दर्शाती है, जहाँ सत्ता, धर्म और स्थानीय परंपराओं का स्थापत्य रूप में समन्वय दिखाई देता है। तेरहवीं से पंद्रहवीं शताब्दी के बीच विकसित इस स्थापत्य परंपरा में मेहराब, गुंबद और नई निर्माण तकनीकों का प्रयोग हुआ, जो आगे चलकर इंडो-इस्लामी स्थापत्य की पहचान

Scroll to Top