पेशवाओं का उदय
modern india

पेशवाओं का प्रभाव: मराठा साम्राज्य में नेतृत्व और युद्धों की कहानी

पेशवाओं के अधीन मराठा साम्राज्य: प्रारंभिक पेशवाओं की उपलब्धियां   मुगल सम्राट औरंगजेब की सेनाओं ने 1689 में दक्षिण में बड़ी सफलता पाई। शिवाजी के पुत्र और उत्तराधिकारी संभाजी को हराकर मार दिया गया और उनके पुत्र शाहू को बंदी बना लिया गया। मराठा हार गए लेकिन उन्हें पूरी तरह वश में नहीं किया जा […]

18th century Indian market
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18वीं सदी में भारत की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति: एक व्यापक विश्लेषण

18वीं सदी में भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थितियाँ   18वीं सदी में भारत में कई राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता के बावजूद समाज में कई पारंपरिक विशेषताएँ बनी रही। हालांकि कुछ नई परिस्थितियाँ भी सामने आईं।   18वीं सदी में भारत का सामाजिक वर्गीकरण   सामाजिक संरचना में सबसे ऊपर सम्राट था, जिसके बाद शाही

प्राचीन भारत की वर्णाश्रम व्यवस्था
ancient India

प्राचीन भारत में वर्णाश्रम व्यवस्था: समाज की संरचना और विकास

प्राचीन भारत की वर्णाश्रम व्यवस्था का परिचय   हिन्दू समाज में वर्णाश्रम व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें समाज को दो मुख्य आधारों – वर्ण और आश्रम – में विभाजित किया गया था। यह व्यवस्था मनुष्य के स्वभाव और उसके प्रशिक्षण पर आधारित थी, जिसका उद्देश्य समाज में सामंजस्य बनाए रखना और सभी को उनके

Status of women in ancient India
ancient India

प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति: एक ऐतिहासिक विश्लेषण

किसी भी समाज या सभ्यता की मूल आत्मा को समझने के लिए वहां की स्त्रियों की स्थिति का आकलन करना सर्वोत्तम मार्ग है। किसी भी संस्कृति की श्रेष्ठता का माप, उस समाज में स्त्रियों की स्थिति के आधार पर ही अधिक सटीकता से किया जा सकता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में, विशेषकर हिन्दू समाज में, यह

भारत में जाति प्रथा की उत्पत्ति
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भारत में जाति प्रथा की उत्पत्ति: ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक पहलू

भारतीय जाति व्यवस्था, जो हमारी सामाजिक संरचना का एक अनिवार्य हिस्सा है, ने सदियों से हमारे समाज को आकार दिया है। यह व्यवस्था न केवल सामाजिक वर्गीकरण को दर्शाती है, बल्कि यह धार्मिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। जातियों का यह विभाजन हमारे इतिहास में गहराई से समाहित है, और यह

मुगल साम्राज्य के पतन के वक्त भारत का मानचित्र
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मुगल साम्राज्य के पतन के कारण: इतिहासकारों की अंतर्दृष्टि और विश्लेषण

मुगल साम्राज्य के पतन के कारण   मुगल साम्राज्य का विघटन एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है जिसने भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को बदल दिया। यह साम्राज्य, जो 16वीं से 19वीं शताब्दी तक शक्तिशाली था, अंततः कई आंतरिक और बाहरी कारणों के कारण कमजोर हो गया। इतिहासकारों जैसे जे.एन. सरकार, सिडनी ओवेन, विलियम इर्विन,

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