वॉरेन हेस्टिंग्स के विवाद
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वॉरेन हैस्टिंग्स का विवादास्पद शासन: नंद कुमार और चैत सिंह के मामलों का विश्लेषण

वॉरेन हैस्टिंग्स का नाम भारतीय इतिहास में एक बेहद विवादास्पद और महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में जाना जाता है। वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले गवर्नर-जनरल थे, लेकिन उनका शासन कभी भी निष्कलंक नहीं रहा। उनकी नीतियाँ, उनके द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधार और उनके खिलाफ उठे आरोप आज भी इतिहासकारों के बीच बहस […]

टिली केटल द्वारा वॉरेन हेस्टिंग्स का चित्र, जिसमें वह formal पोशाक पहने हुए हैं और उनके चेहरे पर गंभीर अभिव्यक्ति है।
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वॉरेन हेस्टिंग्स के प्रशासनिक, राजस्व और न्यायिक सुधारों का ऐतिहासिक विश्लेषण

वॉरेन हैस्टिंग्स और उनके प्रशासनिक तथा राजस्व सुधार   1772 में वॉरेन हैस्टिंग्स को बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया। यह ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। कंपनी ने मुग़ल साम्राज्य की सत्ता को स्वीकार करते हुए बंगाल पर विजय प्राप्ति के अधिकार से शासन करने का निर्णय लिया। इस समय

रॉबर्ट क्लाइव और शाह आलम II का ऐतिहासिक मिलन, 1765 में, इलाहाबाद संधि के बाद।
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रॉबर्ट क्लाइव और बक्सर की विजय: बंगाल में ड्यूल सिस्टम की स्थापना और इसके दुष्प्रभाव

जब बक्सर की विजय की खबर इंग्लैंड पहुंची, तो लंदन में सामान्य राय थी कि वह व्यक्ति, जिसने बंगाल में कंपनी की राजनीतिक शक्ति की नींव रखी थी, उसे फिर से भेजा जाना चाहिए ताकि उस नींव पर मजबूत इमारत को खड़ी किया जा सके। इस प्रकार रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल में ब्रिटिश उपनिवेशों का

इस्फ़हान में शाह तहमास I और मुगल सम्राट हुमायूँ की मुलाकात का चित्र।
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मुगलों की विदेश नीति: मध्य एशिया के साथ ऐतिहासिक संबंध और कूटनीतिक रणनीतियाँ

मुगल साम्राज्य की विदेशी नीति: सरहद, सुरक्षा और व्यापारिक संबंध   मुगल साम्राज्य की सरहदें और सुरक्षा   मुगल साम्राज्य ने उत्तर-पश्चिमी दिशा में भारत की सरहदें वैज्ञानिक तरीके से बनाई। इनकी सीमा के एक ओर हिंदूकुश था, दूसरी ओर काबुल-गजनी रेखा थी, और कंधार इसका बाहरी किला था। मुगल शासकों का मुख्य उद्देश्य इस

बौद्धकालीन भारत में नगरिकरण
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बुद्धकालीन भारत में नगरीकरण और कृषि: व्यापार और आर्थिक संरचना का विकास

बौद्धकालीन भारत में नगरिकरण का विस्तार भारतीय इतिहास में आर्थिक परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस समय गंगा के मैदानों में नई बसाहटें, लौह-उपकरणों का बढ़ता उपयोग, कृषि उत्पादन में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार देखा गया। बुद्ध के समय से आरंभ होता यह सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन बाद में मौर्य और उत्तर-मौर्य

पेशवा कालीन दरबार का चित्र
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पेशवा काल में मराठा प्रशासन: सैन्य, संरचना और आर्थिक प्रणाली की गहरी समझ

पेशवाओं के अधीन मराठा प्रशासन   18वीं और 19वीं सदी के प्रारंभ में मराठा प्रशासन एक अनोखा मिश्रण था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों संस्थाओं का समावेश था। मराठा राज्य तब अस्तित्व में आया जब हिंदू और मुस्लिम शासन की नीतियों और उनके प्रशासनिक ढांचे के बीच लंबा समय तक परस्पर प्रभाव पड़ा। इस शासन

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