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सातवाहन शासन व्यवस्था का विश्लेषण: प्रशासन, राजस्व, सामन्तवाद और राजनीतिक संरचना

सातवाहन शासन व्यवस्था : दक्कन की राजनीतिक संरचना और राज्यसत्ता का ऐतिहासिक विकास   दक्कन क्षेत्र में सातवाहनों का उदय भारतीय इतिहास में उस चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जब उत्तर भारत में मौर्य-उत्तर संक्रमणकाल था और दक्षिण में स्थानीय शक्तियाँ व्यापक संगठन की ओर अग्रसर थीं। सातवाहन शासन व्यवस्था केवल एक राजवंश की राजनीतिक […]

नासिक गुफा संख्या 3 गौतमीपुत्र विहार – सातवाहन काल की बौद्ध शिल्पकला और सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक जीवन को दर्शाती प्राचीन गुफा
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सातवाहन काल: सामाजिक, आर्थिक व धार्मिक जीवन का शोधपूर्ण अध्ययन

  सातवाहन काल का सामाजिक आर्थिक और धार्मिक जीवन   दक्षिणापथ के ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए सातवाहन काल का सामाजिक आर्थिक और धार्मिक जीवन एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अध्ययन विषय है। इस सामाजिक-धार्मिक संरचना को समझने के लिए यह भी आवश्यक है कि सातवाहनों के राजनीतिक उभार और भू-क्षेत्रीय विस्तार की प्रक्रिया को पहले

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सातवाहन इतिहास के स्रोत: साहित्य, अभिलेख, सिक्के और उनकी प्रमाणिकता का सम्पूर्ण विश्लेषण

सातवाहन इतिहास के स्रोत और उनकी प्रमाणिकता   दक्कन के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास में सातवाहन वंश एक ऐसा अध्याय है जिसने न केवल दक्षिण भारत की सत्ता-संरचना को नई दिशा दी, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप में उत्तर–दक्षिण संपर्कों को भी सुदृढ़ किया। सातवाहन साम्राज्य के लगभग चार शताब्दियों तक चले इस दीर्घकालिक शासन का संपूर्ण

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गौतमीपुत्र शातकर्णि: सातवाहन साम्राज्य का पुनरुत्थान और भारत के प्राचीन इतिहास का निर्णायक अध्याय

सातवाहन वंश का संक्रमण काल: शातकर्णि प्रथम से गौतमीपुत्र शातकर्णि तक   शातकर्णि प्रथम के बाद सातवाहन वंश लगभग एक शताब्दी तक उस प्रकार के राजनीतिक अस्थिरता, आंतरिक विखंडन और बाहरी दबाव से गुजरता है जिसने उसके संपूर्ण राजनीतिक ढांचे को गहरे स्तर तक क्षतिग्रस्त कर दिया। पुराणों में इस अवधि के 10 से 19

सातवाहन साम्राज्य का उदय और विस्तार दर्शाने वाला मानचित्र — 125 ईस्वी में सातवाहन साम्राज्य की मुख्य सीमाएँ और केंद्र प्रदर्शित।
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सातवाहन साम्राज्य का उदय और विस्तार: दक्कन की शक्ति कैसे बनी भारत की प्रमुख सत्ता?

सातवाहन वंश की उत्पत्ति और उदय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि   सातवाहन साम्राज्य का उदय और विस्तार भारतीय इतिहास के उस संक्रमणकाल से जुड़ा है जिसमें मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद दक्षिण और मध्य भारत में राजनीतिक रिक्ति उत्पन्न हुई। इस रिक्ति को भरने के लिए अनेक स्थानीय कुलों ने अपनी-अपनी शक्ति का विस्तार करना

हम्पी का रथ मंदिर – विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य कला और दक्षिण भारत के स्वर्ण युग का प्रतीक
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विजयनगर साम्राज्य: दक्षिण भारत का स्वर्ण युग जहाँ शक्ति, संस्कृति और नीति का संगम हुआ

  भारतीय इतिहास में विजयनगर साम्राज्य का स्थान   भारत का इतिहास केवल उत्तर भारत की सल्तनतों और मुग़ल शासन तक सीमित नहीं है; दक्षिण भारत ने भी ऐसे महान साम्राज्यों को जन्म दिया जिन्होंने न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और स्थापत्य दृष्टि से भी भारत की आत्मा को समृद्ध किया। इन्हीं

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