सैन्धव सभ्यता का विनाश: कारण और प्रमुख सिद्धांत

सैन्धव सभ्यता, जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, प्राचीन सभ्यताओं में से एक अत्यधिक उन्नत और समृद्ध सभ्यता थी। हालांकि, यह सभ्यता 1900 ईसा पूर्व के आस-पास अचानक गायब हो गई और हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, और धोलावीरा जैसे शहरों को छोड़ दिया। इस लेख में, हम सैन्धव सभ्यता के पतन के कारण और विभिन्न सिद्धांतों पर चर्चा करेंगे, जैसे प्राकृतिक आपदाएँ, जलवायु परिवर्तन, बाहरी आक्रमण, और आर्थिक संकट।

 

Ancient ruins of Mohenjo-Daro, a major city of the Indus Valley Civilization, showing well-preserved structures and historical artifacts.
मोहनजोदड़ो – सिंधु घाटी सभ्यता का प्राचीन चमत्कारी शहर, जिसमें अद्वितीय शहरी योजना और वास्तुकला दिखाई देती है।

 

तिहासकार ये कैसे पता लगाते है की किसी सभ्यता का पतन कैसे हुआ?

 

प्राचीन सभ्यताओं के पतन को समझने के लिए इतिहासकार कई तरह के संकेतों और प्रमाणों का इस्तेमाल करते हैं।

 

1. लिखित दस्तावेज़ और शिलालेख

 

प्राचीन सभ्यताओं ने अपने समय के बारे में लिखित रिकॉर्ड छोड़े थे, जैसे राजा के आदेश, युद्ध की कहानियाँ, या किसी संकट का वर्णन। अगर किसी सभ्यता के बारे में यह लिखा हो कि “हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा” या “हमारा राजा हार गया और शहर को छोड़ दिया,” तो ये संकेत देते हैं कि वहां कोई बड़ा संकट या पतन हुआ था।

जैसे उत्तरी अमेरिका के मैक्सिको, ग्वाटेमाला, होंडुरास एवं अल – सैल्वाड़ोर में स्थित माया सभ्यता के बारे में हमें कई ग्रंथ मिलते हैं, जिनमें सामाजिक असमानताएँ और युद्धों का उल्लेख है। इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध और आंतरिक संघर्ष ने उनकी सभ्यता को कमजोर किया था।

 

2. पुरातात्विक खुदाई (Archaeological Evidence)

 

इतिहासकार पुरानी बस्तियों, शहरों और घरों के अवशेषों को खंगालते हैं। अगर किसी शहर में अचानक से बर्बादी या अजीब बदलाव दिखे (जैसे घरों में सामान बिखरा हुआ हो या जल की व्यवस्थाएँ बंद पड़ी हों), तो इससे यह पता चलता है कि वहां कुछ गंभीर घटना घटी होगी, जैसे प्राकृतिक आपदा या आक्रमण।

जैसे दक्षिण अमेरिका में स्थित इन्का सभ्यता के शहरों में बुरी तरह से टूटे हुए मकान और जलाशयों की कमी मिलती है, जो यह दर्शाता है कि उनके शहरों में कोई बड़ा संकट आया था।

 

3. प्राकृतिक आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन

 

अगर किसी सभ्यता के कृषि और जलवायु से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो यह उसकी समृद्धि को प्रभावित करता है। जैसे बहुत ज्यादा सूखा या बर्फबारी, ये सभ्यता के पतन के कारण बन सकते हैं।

जैसे भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों से यह लगता है कि अचानक मौसम में बदलाव और सूखा आया था, जिसने उनकी कृषि प्रणाली को प्रभावित किया और अंततः सभ्यता का पतन हुआ।

 

4. आर्थिक और सामाजिक संकट

 

कभी-कभी किसी सभ्यता का पतन उसके अंदर के सामाजिक और आर्थिक संघर्षों के कारण होता है। जब कुछ लोग बहुत अमीर हो जाते हैं और बाकी लोग गरीब, तो समाज में असंतोष बढ़ता है, जिससे अंततः सभ्यता का पतन हो सकता है।

जैसे रोम साम्राज्य में धीरे-धीरे अमीर और गरीब के बीच फासला बढ़ने लगा। सैनिकों को सही वेतन नहीं मिलता था, और भ्रष्टाचार बढ़ गया था। यह सारे कारण मिलकर अंत में रोम साम्राज्य के पतन का कारण बने।

 

5. विदेशी आक्रमण

 

कभी-कभी सभ्यताएँ बाहरी हमलों के कारण भी नष्ट हो जाती हैं। जब कोई शक्तिशाली जनजाति या देश आक्रमण करता है, तो उसे बचाने के लिए शहरों का बचाव करना मुश्किल हो जाता है। जैसे रोम साम्राज्य का पतन जर्मनिक जनजातियों जैसे वांडल्स, गोट्स और हंस के आक्रमणों के कारण हुआ था। इन जनजातियों ने रोम पर हमला किया और उसे कमजोर कर दिया।

इतिहासकार इन सब साक्ष्यों का मिलाकर यह पता लगाते हैं कि किसी प्राचीन सभ्यता का पतन कैसे हुआ। ये विभिन्न कारण हो सकते हैं –

  • लिखित दस्तावेज़,
  • पुरातात्विक अवशेष,
  • प्राकृतिक आपदाएँ,
  • आंतरिक संघर्ष,
  • और बाहरी आक्रमण।

इन सभी तथ्यों का विश्लेषण करके वे हमें बताते हैं कि इतिहास में एक सभ्यता का अंत कैसे हुआ।

 

सैन्धव सभ्यता के पतन के मुख्य कारण: क्या थे प्रमुख कारण?

(Main Causes Behind the Collapse of Indus Civilization: What Were the Key Factors?)

हड़प्पा सभ्यता का अध्ययन करने से यह स्पष्ट होता है कि यह सभ्यता अपने अन्तिम चरण में पतन की ओर बढ़ रही थी। इस दौरान उनके बर्तनों का स्तर गिर चुका था और भवन भी छोटे-छोटे कमरों में बदल गए थे। अन्ततः द्वितीय सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य, यह सभ्यता पूरी तरह से नष्ट हो गई।

सैन्धव सभ्यता का पतन कई कारणों का परिणाम हो सकता है। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों ने इसके कारणों पर विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। हालांकि कोई एक स्पष्ट कारण नहीं मिला, फिर भी कुछ प्रमुख कारण सामने आए हैं जो इसके विनाश में सहायक हो सकते हैं।

 

बाढ़ और नदी परिवर्तन: क्या सैन्धव सभ्यता का पतन बाढ़ की वजह से हुआ था?

(Floods and River Changes: Did Floods Contribute to the Fall of Indus Civilization?)

 

कई विद्वानों का मानना है कि इस सभ्यता का पतन मुख्यतः नदी की बाढ़ के कारण हुआ। हड़प्पा और मोहेनजोदड़ो जैसे शहर नदियों के किनारे बसे थे। प्रतिवर्ष बाढ़ इन नगरों को नुकसान पहुंचाती थी। हड़प्पा और मोहेनजोदड़ो की खुदाई से यह सामने आया कि इन नगरों का पुनर्निमाण कई बार किया गया। हर बार भवनों का निर्माण ऊँचे धरातल पर किया जाता था ताकि बाढ़ से बचा जा सके।

मार्शल ने मोहेनजोदड़ों की खुदाई में कई बालू की परतें पाई थीं, जो बाढ़ के कारण जमा हुई थीं। इसी प्रकार, मैके ने चन्नूदड़ों की खुदाई में भी बाढ़ के प्रमाण पाए थे। एस. आर. राव ने लोथल और भागत्राव में भी बाढ़ के संकेत देखे। इन बाढ़ों के कारण यहाँ के समृद्ध बन्दरगाह नष्ट हो गए थे और लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए थे।

हालांकि, यह मानना जरूरी है कि सिर्फ बाढ़ के कारण ही सभी सैन्धव नगरों का पतन नहीं हुआ। कई नगर जो नदियों के किनारे नहीं थे, वे भी नष्ट हो गए। इसलिए, हमें सभ्यता के विनाश के लिए अन्य कारणों पर भी विचार करना चाहिए।

 

बाहरी आक्रमण और युद्ध: क्या आर्यों ने सैन्धव नगरों पर आक्रमण किया था?

(Foreign Invasions and Wars: Did Aryans Attack the Indus Cities?)

कुछ विद्वान जैसे गार्डेन चाइल्ड, मार्टीमर व्हीलर और स्टुबर्ट पिगट का मानना है कि बाहरी आक्रमणों ने भी सैन्धव सभ्यता के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खुदाई में यह पाया गया कि मोहेनजोदड़ो को लूटा गया था और वहाँ के लोगों की निर्दयतापूर्वक हत्या की गई थी। मिसाल के तौर पर मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले एक कमरे में 13 मृतकों के अस्थिपंजर मिले थे और कुछ गलियों में स्त्रियों और बच्चों के शव भी पाए गए थे।

व्हीलर का मानना था कि लगभग 1500 ईसा पूर्व के आस-पास आर्यों ने अचानक आक्रमण कर सैन्धव नगरों को नष्ट कर दिया। हालांकि, आर्य आक्रमण का सिद्धांत अब अधिक विश्वास नहीं किया जाता। मोहेनजोदड़ो में पाए गए कंकालों से यह प्रमाण नहीं मिलता कि यहाँ बड़े पैमाने पर युद्ध हुआ था।

इन कंकालों में घाव के निशान कम थे और कई के सिर पर हल्की चोटें थीं, जो यह दर्शाती हैं कि मृत्यु और चोट के बीच का समय अधिक था। इसके अलावा, इन कंकालों के स्तर से युद्ध के किसी प्रकार के उपकरण जैसे बाण, भाला, कवच आदि नहीं मिले, जो यह दर्शाता है कि युद्ध का सिद्धांत ज्यादा प्रामाणिक नहीं है।

 

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय प्रभाव: क्या सूखा और जंगलों की कटाई ने सभ्यता को प्रभावित किया?

(Climate Change and Environmental Impact: Did Drought and Deforestation Affect the Indus Civilization?)

 

सैन्धव सभ्यता के पतन के पीछे कुछ विद्वान जलवायु परिवर्तन को भी कारण मानते हैं। आरेल स्टीन और ए. एन. घोष जैसे विद्वानों का मानना है कि पहले इस क्षेत्र में काफी वर्षा होती थी और घने जंगल थे। लेकिन समय के साथ जंगलों की कटाई और घास की समाप्ति के कारण वर्षा की मात्रा घट गई, जिससे कृषि की पैदावार कम हो गई।

इसके कारण सूखा पड़ा और भुखमरी का संकट बढ़ा। जलवायु परिवर्तन से नदियाँ भी सूखने लगीं और इसने सभ्यता के पतन को तेज किया।

 

प्राकृतिक आपदाएँ और महामारी: क्या इन आपदाओं ने सभ्यता का पतन किया?

(Natural Disasters and Pandemics: Did These Events Cause the Decline of Indus Civilization?)

 

एम. आर. साहनी ने बताया कि सैन्धव नगरों का विनाश भारी जलप्लावन के कारण हुआ। इस जलप्लावन से जमीन की स्थिति दलदल जैसी हो गई और यातायात बाधित हुआ। इसके साथ ही कृषि में भी कमी आई, जिससे लोग अपना घर छोड़कर अन्य स्थानों पर बसने लगे।

इसके अलावा, कुछ विद्वान जैसे के. पू. आर. कनेडी का मानना है कि सैन्धव सभ्यता के लोग मलेरिया और अन्य महामारी जैसी बीमारियों के शिकार हुए। यह प्राकृतिक आपदाएँ सभ्यता के अंत का कारण हो सकती हैं।

 

नदियों के मार्ग परिवर्तन: क्या नदी का मार्ग बदलने से सैन्धव सभ्यता नष्ट हुई?

(River Course Changes: Did Altered River Paths Lead to the Collapse of Indus Civilization?)

 

कुछ विद्वान यह भी मानते हैं कि नदियों के मार्ग परिवर्तन ने सैन्धव सभ्यता को नष्ट किया। एच. टी. लैम्ब्रिक और माधोस्वरूप वत्स के अनुसार सिन्धु और अन्य नदियों के मार्ग बदलने से पानी की कमी हो गई और जलवायु में बदलाव आया।

वात्स के अनुसार, हड़प्पा सभ्यता का पतन रावी नदी के मार्ग परिवर्तन के कारण हुआ था। जी. एफ. देल्स ने कालीबंगन के विनाश का कारण घग्गर नदी और उसकी सहायक नदियों के मार्ग परिवर्तन को माना। इस बदलाव से खेती और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा और जलीय व्यापार ठप्प हो गया, जिससे सभ्यता का पतन हुआ।

 

आर्थिक संकट और व्यापार का ठप्प होना: क्या व्यापार के बंद होने से सभ्यता को नुकसान हुआ?

(Economic Crisis and the Disruption of Trade: Did the End of Trade Contribute to the Collapse of Indus Civilization?)

 

कुछ विद्वान मानते हैं कि आर्थिक संकट ने भी सैन्धव सभ्यता के पतन में भूमिका निभाई। पश्चिमी एशिया, खासकर सुमेरियन सभ्यता के साथ व्यापार इस सभ्यता का मुख्य आधार था। लगभग 1750 ई.पू. के आसपास यह व्यापार अचानक बंद हो गया। इस कारण सैन्धव सभ्यता की समृद्धि समाप्त हो गई और नगरीय जीवन का अंत हुआ। व्हीलर ने यह भी बताया कि इस समय में बड़ी इमारतें छोटी हो गईं और पुरानी ईंटों से मकान बनाए गए।

 

अदृश्य गाज का सिद्धांत: क्या यह रासायनिक विस्फोट था जिसने सभ्यता को नष्ट किया?

(The Invisible Gas Theory: Was a Chemical Explosion Behind the Collapse of Indus Civilization?)

 

रूसी विद्वान एम. दिमित्रियेव ने एक अजीब सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनका मानना था कि सैन्धव सभ्यता का सैन्धव सभ्यता का पतन किसी भौतिक रासायनिक विस्फोट, जिसे उन्होंने ‘अदृश्य गाज’ कहा, के कारण हुआ। उनके अनुसार यह विस्फोट इतनी ताकतवर था कि इसके कारण तापमान 15000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और इससे सब कुछ नष्ट हो गया। उन्होंने मोहेनजोदड़ो में मिले नरकंकालों और पिघले हुए पाषाण अवशेषों को इस सिद्धांत के समर्थन में प्रस्तुत किया।

 

निष्कर्ष: सैन्धव सभ्यता का पतन क्यों हुआ था?

(Conclusion: Why Did the Indus Civilization Collapse?)

 

सैन्धव सभ्यता का पतन एक जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया का परिणाम था, जिसमें कई कारण शामिल थे। बाढ़, बाह्य आक्रमण, जलवायु परिवर्तन, महामारी, नदियों के मार्ग परिवर्तन और आर्थिक संकट, इन सभी ने मिलकर इस सभ्यता को समाप्त किया। कुछ विद्वान इसके अंत को अचानक हुई आपदाओं का परिणाम मानते हैं, जबकि अन्य इसे एक धीरे-धीरे हुए पतन के रूप में देखते हैं।

यह स्पष्ट है कि सभ्यता का विघटन एक ही कारण से नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न कारणों के संयोजन ने इसके अस्तित्व को समाप्त किया। जलवायु परिवर्तन और नदियों का मार्ग बदलने से हुए संकटों ने, साथ ही व्यापार के ठप्प पड़ने और बाहरी आक्रमणों ने, इस सभ्यता की नींव को कमजोर किया। अंततः, सैन्धव सभ्यता का पतन एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया थी, जिसे किसी एक कारण से नहीं समझा जा सकता।

 

Further Reference 

 

1. A.L. Basham : The Wonder that was India.

2. S.P. Gupta : The lost Sarasvati and the Indus Civilisation.

3. B.B. Lal : India 1947–1997: New Light on the Indus Civilization.

4. Irfan Habib : The Indus Civilization.

5. Shereen Ratnagar : Understanding Harappa: Civilization in the Greater Indus Valley.

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