ancient India
प्राचीन भारत मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक संरचना को समझने का सबसे महत्वपूर्ण युग है। इस श्रेणी में तारिख-ए-जहाँ आपको हड़प्पा सभ्यता, वैदिक काल, आर्य आगमन, महाजनपदों का उदय, बौद्ध–जैन धर्म, मौर्य साम्राज्य, अशोक के शासन, गुप्तकालीन प्रगति, आर्थिक संरचना और राजनीतिक विकास जैसे विषयों का गहन विश्लेषण प्रदान करता है।
हमारा लक्ष्य UPSC, SSC, NET-JRF और इतिहास प्रेमियों के लिए विश्वसनीय, तथ्य-आधारित और शोधपरक सामग्री प्रस्तुत करना है। यहाँ प्रत्येक लेख में घटनाओं का ऐतिहासिक महत्व, सामाजिक प्रभाव, प्रशासनिक व्यवस्था, कला–संस्कृति, व्यापार–अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक बदलावों को सरल भाषा में समझाया गया है।
प्राचीन भारत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की नींव है। इन लेखों के माध्यम से आप उस दौर की राजनीतिक संरचना, धार्मिक परिवर्तन, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक मान्यताओं को गहराई से समझ सकेंगे।
ancient Indiaमेगस्थनीज और उसकी इण्डिका मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था, जिसे सेल्युकस ‘निकेटर’ ने चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। मेगस्थनीज भारत आने से पहले आरकोरिया के क्षत्रप के दरबार में भी सेल्युकस का राजदूत रह चुका था। अनुमान है कि वह ईसा पूर्व 304 से 299 के बीच पाटलिपुत्र में चन्द्रगुप्त मौर्य की […]
ancient Indiaचन्द्रगुप्त मौर्य का प्रारंभिक जीवन: रहस्यमयी शुरुआत चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रारम्भिक जीवन भी उनकी उत्पत्ति के समान ही अंधकारपूर्ण था। उनके बचपन के बारे में हमें अधिकांश जानकारी बौद्ध ग्रंथों से मिलती है। यद्यपि वह साधारण कुल में उत्पन्न हुए थे, लेकिन उनमें बचपन से ही महान बनने के सभी लक्षण थे। चन्द्रगुप्त
ancient Indiaमौर्य साम्राज्य – जाति, वर्ग और शूद्र-क्षत्रिय बहस मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ था, जिसकी स्थापना सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। मौर्य वंश की उत्पत्ति, विशेषकर चंद्रगुप्त की जाति भारत के इतिहास में लगातार विवाद का विषय रही है। कुछ स्रोत उन्हें शूद्र बताते हैं, जबकि अन्य उन्हें
ancient Indiaप्राचीन भारत में दास प्रथा भारत में दास प्रथा की शुरुआत प्राचीन ऋग्वेद काल से मानी जाती है। ऋग्वेद में ‘दास’, ‘दस्यु’ और ‘असुर’ शब्दों का प्रयोग आर्यों से भिन्न वर्ण के रूप में हुआ है। कुछ विद्वान मानते हैं कि ये लोग द्रविड़ भाषा बोलते थे और इन्हें सैन्धव सभ्यता का निर्माता माना
ancient India उत्तर वैदिक काल उत्तर वैदिक काल का इतिहास ऋग्वेद के बाद के ग्रंथों से मिलता है। यह काल लगभग ई. पू. 1000 से 600 तक माना जाता है। ऋग्वैदिक काल में आर्य सभ्यता पंजाब और सिन्ध क्षेत्र तक सीमित थी। हालांकि, उत्तर वैदिक काल में आर्य सभ्यता का विस्तार एक बड़े क्षेत्र में
ancient Indiaऋग्वैदिक कालीन धर्म और धार्मिक विश्वास: ऋग्वैदिक आर्य समाज की धार्मिक प्रणाली ऋग्वैदिक आर्य समाज का धार्मिक जीवन अत्यंत विस्तृत और जटिल था, जबकि उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन सरल था। ऋग्वैदिक कालीन धर्म में ‘बहुदेववाद’ प्रमुख था। आर्य देवताओं को प्राकृतिक शक्तियों के रूप में देखते थे। इन देवताओं का मानवीकरण किया गया