Author name: Vivek Singh

Vivek Singh is the founder of Tareek-e-Jahan, a Hindi history blog offering evidence-based and exam-oriented perspectives on Indian history.

1857 का विद्रोह: भारतीय समाज में वर्ग संघर्ष की ऐतिहासिक व्याख्या
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1857 का विद्रोह: भारतीय समाज में वर्ग संघर्ष की ऐतिहासिक व्याख्या

1857 का विद्रोह और भारतीय समाज में वर्ग संघर्ष   1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई। इस विद्रोह की प्रकृति, इसका सामाजिक आधार और इसके परिणामों को समझने के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों से इसे देखा गया है। मार्क्सवादी दृष्टिकोण विशेष रूप से […]

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इजराइल की कहानी: जियोनिज्म से लेकर इजराइल के निर्माण तक

इजराइल 1947 से वर्तमान तक बालफ़ोर की चिट्ठी: एक ऐतिहासिक मोड़ किसने सोचा था की 2 नवंबर, 19170 को ब्रिटिश विदेश सचिव आर्थर बालफ़ोर की लिखी चिट्ठी भविष्य में ऐसे जंगो का आगाज़ करेगी, जिसकी तपिश 100 सालो बाद भी मानवता महसूस करेगी। जब बालफ़ोर ने अंग्रेज सरकार की फिलीस्तीन में यहूदियों के लिए एक

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बिरसा मुंडा : इंसान से भगवान बनने की कथा

केन्या के राष्ट्रपिता और पहले राष्ट्रपति Jomo Kenyatta ने अपनी किताब Suffering without Bitterness: The founding of the Kenya Nation में लिखते है कि “जब ब्रिटिश पहली बार अफ्रीका आए, तो उनके हाथों में बाइबल थी, और हमारे पास जमीन। उन्होंने हम से कहा चलो प्रार्थना करते हैं, हमने जब आंखें खोली तो हमारे हाथों

गदर पार्टी की स्थापना का प्रतीक उसका झंडा
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गदर पार्टी की स्थापना: भारत के स्वतंत्रता संग्राम की विदेशों में जन्मी क्रांति

  गदर आंदोलन: एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी संघर्ष   गदर आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जिसकी जड़ें गदर पार्टी की स्थापना में निहित हैं। गदर पार्टी ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक संगठित और सशक्त क्रांति के रूप में उभरा। गदर आंदोलन की नींव भारत के बाहर प्रवासी भारतीयों द्वारा रखी गई

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कोमागाटामारू घटना: ब्रिटिश नस्लवाद और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर असर

कोमागाटामारू जहाज 1914 में जापानी जहाज कोमागाटामारू की घटना एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संघर्ष की लहर पैदा की। यह घटना सिर्फ एक जहाज की यात्रा से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह उन सभी कठिनाइयों और संघर्षों का प्रतीक

कांग्रेस के गरमपंथी नेता - बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल
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सूरत अधिवेशन 1907: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का विभाजन और उसके परिणाम

  सूरत अधिवेशन 1907 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक निर्णायक क्षण था, जहां कांग्रेस के अंदर वर्षों से पनप रहे मतभेदों ने खुलकर सामने आकर पार्टी को विभाजित कर दिया। यह अधिवेशन कांग्रेस के दो धड़ों – नरमपंथी और गरमपंथी – के बीच की खाई को उजागर करता है। पृष्ठभूमि: बंगाल विभाजन और

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