Author name: Vivek Singh

Vivek Singh is the founder of Tareek-e-Jahan, a Hindi history blog offering evidence-based and exam-oriented perspectives on Indian history.

इस्फ़हान में शाह तहमास I और मुगल सम्राट हुमायूँ की मुलाकात का चित्र।
Medieval India

मुगलों की विदेश नीति: मध्य एशिया के साथ ऐतिहासिक संबंध और कूटनीतिक रणनीतियाँ

मुगल साम्राज्य की विदेशी नीति: सरहद, सुरक्षा और व्यापारिक संबंध   मुगल साम्राज्य की सरहदें और सुरक्षा   मुगल साम्राज्य ने उत्तर-पश्चिमी दिशा में भारत की सरहदें वैज्ञानिक तरीके से बनाई। इनकी सीमा के एक ओर हिंदूकुश था, दूसरी ओर काबुल-गजनी रेखा थी, और कंधार इसका बाहरी किला था। मुगल शासकों का मुख्य उद्देश्य इस […]

बौद्धकालीन भारत में नगरिकरण
ancient India

बुद्धकालीन भारत में नगरीकरण और कृषि: व्यापार और आर्थिक संरचना का विकास

बौद्धकालीन भारत में नगरिकरण का विस्तार भारतीय इतिहास में आर्थिक परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस समय गंगा के मैदानों में नई बसाहटें, लौह-उपकरणों का बढ़ता उपयोग, कृषि उत्पादन में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार देखा गया। बुद्ध के समय से आरंभ होता यह सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन बाद में मौर्य और उत्तर-मौर्य

पेशवा कालीन दरबार का चित्र
modern india

पेशवा काल में मराठा प्रशासन: सैन्य, संरचना और आर्थिक प्रणाली की गहरी समझ

पेशवाओं के अधीन मराठा प्रशासन   18वीं और 19वीं सदी के प्रारंभ में मराठा प्रशासन एक अनोखा मिश्रण था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों संस्थाओं का समावेश था। मराठा राज्य तब अस्तित्व में आया जब हिंदू और मुस्लिम शासन की नीतियों और उनके प्रशासनिक ढांचे के बीच लंबा समय तक परस्पर प्रभाव पड़ा। इस शासन

पेशवाओं का उदय
modern india

पेशवाओं का प्रभाव: मराठा साम्राज्य में नेतृत्व और युद्धों की कहानी

पेशवाओं के अधीन मराठा साम्राज्य: प्रारंभिक पेशवाओं की उपलब्धियां   मुगल सम्राट औरंगजेब की सेनाओं ने 1689 में दक्षिण में बड़ी सफलता पाई। शिवाजी के पुत्र और उत्तराधिकारी संभाजी को हराकर मार दिया गया और उनके पुत्र शाहू को बंदी बना लिया गया। मराठा हार गए लेकिन उन्हें पूरी तरह वश में नहीं किया जा

18th century Indian market
modern india

18वीं सदी में भारत की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति: एक व्यापक विश्लेषण

18वीं सदी में भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थितियाँ   18वीं सदी में भारत में कई राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता के बावजूद समाज में कई पारंपरिक विशेषताएँ बनी रही। हालांकि कुछ नई परिस्थितियाँ भी सामने आईं।   18वीं सदी में भारत का सामाजिक वर्गीकरण   सामाजिक संरचना में सबसे ऊपर सम्राट था, जिसके बाद शाही

प्राचीन भारत की वर्णाश्रम व्यवस्था
ancient India

प्राचीन भारत में वर्णाश्रम व्यवस्था: समाज की संरचना और विकास

प्राचीन भारत की वर्णाश्रम व्यवस्था का परिचय   हिन्दू समाज में वर्णाश्रम व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें समाज को दो मुख्य आधारों – वर्ण और आश्रम – में विभाजित किया गया था। यह व्यवस्था मनुष्य के स्वभाव और उसके प्रशिक्षण पर आधारित थी, जिसका उद्देश्य समाज में सामंजस्य बनाए रखना और सभी को उनके

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