Author name: Vivek Singh

Vivek Singh is the founder of Tareek-e-Jahan, a Hindi history blog offering evidence-based and exam-oriented perspectives on Indian history.

सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
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सहायक संधि: ब्रिटिश साम्राज्य और भारतीय राज्यों पर प्रभाव

सहायक संधि (Subsidiary Alliance) क्या थी?    सहायक संधि (Subsidiary Alliance) एक राजनीतिक और सैन्य समझौता था, जिसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और भारतीय राज्यों के बीच किया गया था। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को भारत में और अधिक मजबूत बनाना था। भारत में अंग्रेजी राज्य के विस्तार के लिए सहायक संधि […]

महालवाड़ी व्यवस्था
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महालवाड़ी प्रणाली: किसानों और गाँवों पर इसके प्रभाव की समीक्षा

  महालवाड़ी व्यवस्था  ब्रिटिश सरकार द्वारा 1822 में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में शुरू की गई एक भूमि-राजस्व व्यवस्था थी। इसे “महल” यानी गाँव को आधार बनाकर तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व संग्रहण को आसान और प्रभावी बनाना था। इस प्रणाली का नाम “महल” पर पड़ा, क्योंकि इसमें पूरे गाँव को

रैयतवाड़ी व्यवस्था
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रैयतवाड़ी व्यवस्था: भारतीय कृषि में ऐतिहासिक परिवर्तन

  रैयतवाड़ी व्यवस्था क्या है?   रैयतवाड़ी व्यवस्था एक प्रकार की भूमि कर संग्रहण प्रणाली थी, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में लागू किया गया। इस व्यवस्था में किसान को ज़मीन का मालिक माना गया और उन्हें कर का भुगतान करने की जिम्मेदारी दी गई। “रैयत” शब्द का अर्थ है किसान, और “वाड़ी”

स्थायी बंदोबस्त
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बंगाल का स्थायी बंदोबस्त 1793: ऐतिहासिक समझौता और प्रभाव

स्थायी बंदोबस्त 1793 क्या था?   यही वह प्रश्न है जो हर UPSC, SSC, NET या इतिहास पढ़ने वाले छात्र सर्च करता है  और इसी का सीधा, साफ और तथ्यात्मक उत्तर आपका लेख शुरुआत में ही देना चाहिए। 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू किया गया स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) बंगाल, बिहार और उड़ीसा की

पेशवा बाजीराव
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कैसे बाजीराव का योगदान मराठा साम्राज्य के विस्तार में क्रांतिकारी था।

बाजीराव प्रथम का नाम भारतीय इतिहास में एक महान सैनिक और कूटनीतिज्ञ के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मराठा साम्राज्य का विस्तार और भारत में मराठों का प्रभुत्व स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1720 में पेशवा के रूप में नियुक्त होने के बाद, उन्होंने ना केवल युद्ध के मैदान में अपनी वीरता का प्रदर्शन

भारत में लौह युग
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भारत में लोहे का पहला उपयोग: क्या आपको पता है कब हुआ था?

  भारत में लोहे की प्राचीनता    भारत में लोहे का इतिहास बहुत पुराना है, जो विभिन्न साहित्यिक और पुरातात्विक प्रमाणों से सिद्ध होता है। भारत में लोहे के प्रयोग का प्रमाण हमें प्राचीन भारतीय ग्रंथों और खुदाईयों से मिलता है।   भारत में लोहे के साहित्यिक प्रमाण    जैसा की हम जानते है कि,

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